Tuesday, April 14, 2020

मासिक धर्म क्यो ?

*मासिक धर्म क्यों?*

आजकल के बुद्धिजीवी हर परंपरागत बात का विरोध करना ही महानता और अक्लमंदी समझते है। जैसे सुव्वरो को विष्टा का पहाड़ मिल जाए, और प्रसन्न हो जाते है, वैसे ही इन बुध्दि के हिमालयों को स्त्री या शूद्र से संबंधित कोई भी बात मिल जाए तो टूट पड़ते है।

◆धारणात् धर्म:
धारण किया जाता है, इसलिए धर्म है। स्त्रियोंको पक्वता प्राप्त होने पर रजोदर्शन  होता है। यानी पक्वता को धारण तब करती है। ये जो साइकल है वह हर माह (मास) में आता है, तभी उसे *मासिक धर्म* कहा जाता है। धर्म धारण करने का उपलक्षण है। अब मूर्ख धर्म को केवल मजहब या religion समझते है, और जो भी चाहे बकवास करते है।

◆केवल सनातन धार में ही नही, ईसाई और इस्लाम मे भी इस अवस्था मे कुछ कार्य निषिद्ध माने गए है। पर, जिन्हें बकना हैं वे शास्त्र तो पढ़ते नहीं।

◆इसी रक्त से बालक जन्मा है तो वह अपवित्र कैसे??

अब हमें यह बताइए क्या मल-मूत्र किसी और से बनता है कि खाये हुए अन्न से??

तो ये बुद्धि के उपासक कल से स्वयं को सुव्वर से जोड़कर वही खाना शुरू कर दे तो!!!

◆मासिकधर्म के समय उसे सहानुभूति प्रेम चाहिए ।

मूर्खो कब उस समय किसी ने धुत्कारा?? बल्कि आराम दिया। अरे, प्रथम बार रजोदर्शन होने पर उसे पौष्टिक आहार और मिठाई खिलाते है, उत्सव मनाते है, शुद्धि के बाद उपहार देते है, पूजन करते है। पर जिसे केवल त्रुटियाँ गिनना है, उसकी आंख पर पट्टी बंधी रहती है।

◆छूना क्यों नही? ये भेदभाव क्यों?

अभी कोरोना वायरस का संक्रमण हुआ तब क्यो संक्रमित से दूर भागते हो?? वहाँ तो छुआ छूत मानते हो?

यदि रजस्वला का रज विशुध्द रक्त है, तो उसे संग्रह कर रक्त की कमी वाले को दो। दे सकते है?? उसका उपयोग कर सकते है?? यदि नही तो बकवास बन्द करो।

HIV से संक्रमण होने पर रखते हो शारीरिक संबंध क्या उस व्यक्ति से?? क्यों तब तो छुआ छूत मानते हो ।

मतलब संसर्ग से दोषों, गुणों, आदतों, रोग का आदान प्रदान होता ही है। तब जब निश्चित समय के लिए शौच को क्यों नही मानना???

◆उस समय स्त्री दोषी नही, दूषित है। दोष का भी मार्जन हो सकता है, तो अशुद्धि का तो हो ही सकता है। अशुद्ध तो कोई भी हो सकता है। मलद्वार साफ कर , उसी हाथ से खा लेते हो कि धोते हो? जो हाथ धोना या शुद्ध करना शुद्धि का एक अंग है, हाथ के साथ भेदभाव नही। तो  फिर रजस्वला के साथ भेदभाव कैसे हो गया??

◆स्त्रियो की उस समय शारीरिक एवं मानसिक स्थिति को देखते हुए, भविष्य में होनेवाले रोग से बचने हेतु 3 दीन आराम और शुद्धि का विधान किया है।

स्त्रियों की जितनी चिंता सनातन धर्म मे की गई है, क्वचित कहीं और हुई है।

◆ कुछ बुद्धिजीवी हमे सिखाते है कि वह तो वैज्ञानिक है, अरे अवैज्ञानिक तो तुम मूढ़ जन हो जो शास्त्र को अवैज्ञानिक समझने की चेष्टा करते हो। पेस्टिसाइड का उपयोग फल या शाक-भाजी को दूषित करता है।  फिर हम उसे स्वच्छ कर खाते है, तो उसमें भेदभाव है कि सावधानी???

विज्ञान की बातों को शास्त्रीय कहा जाता है । जब सोनोग्राफी का अस्तित्व नही था, तब भी ऋषियो ने गर्भ के दिवस , महीने, के विकास के बारे में कहा। अक्ल के अंधे आंखे खोलो। शास्त्र पढ़ना तो अगले जन्म में भाग्य होगा तो मिलेगा, कम से कम शास्त्र आज्ञा को समझो।

विज्ञान सभर सनातन धर्म मे हर एक प्रश्न का उत्तर है। आवश्यकता है कि समझे।

Saturday, April 11, 2020

मक्का में स्थित काबा का रहस्य


साउदी अरब के मक्का में स्थित काबा का रहस्य

          भारत के लोग और इतिहासकार जब दावा करते है, की मक्का में भगवान् शिव का मंदिर था । तो बहुत से लोग खासकर मुस्लिम समुदाय इसे सच नहीं मानते। भविष्य महापुराण में पैगम्बर  मुहम्मद का नाम महामद हैमहामद शब्द अपभ्रंश होकर मुहम्मद हुआ है। जब कलियुग के 3500 वर्ष बीत गये तब भी वैदिक दैवी धर्म  संस्कृति का विस्तार होता देख त्रिपुराधिपति मयदानव को बहुत चिन्ता हुई कि कलियुग में अधर्म और पाप की वृद्धि होनी चाहिये आसुरी संस्कृति का विस्तार होना चाहिये परंतु कलियुग का कोई प्रभाव नहीं है,  तब कलियुग के 3500 वर्ष बीतने के बाद मयदानव ने  पश्चिम दिशा के रेगिस्तान में जाकर बालू का पार्थिव शिवलिंग बनाकर तपस्या करनी प्रारम्भ की । भगवान शिव त्रिपुराधिपति मयासुर की तपस्या से प्रसन्न हुए वरदान देने के लिये मयासुर के सामने साक्षात् प्रकट हुए तब त्रिपुराधिपति मय ने वरदान माँगा कि  सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग में वैदिक दैवी धर्म का विस्तार होता है परंतु कलियुग में आसुरी राक्षसी धर्म का विस्तार होना चाहिये अतः हे त्रिपुरारी शिवआप मुझे वरदान दें कि कलियुग में यहाँ इस रेगिस्तान में आप मेरे द्वारा बनाये हुए पार्थिव शिवलिंग में साक्षात प्रकट होकर आसुरी म्लेच्छ धर्म संस्कृति का विस्तार करें और म्लेच्छ जाति की रक्षा करें तब भगवान् शिव ने कहा कि तुम्हारा नाम महामद होगातुम म्लेच्छ भाषा का निर्माण करोतुम्हारे ऊपर कृपा करके मै तुम्हारे द्वारा निर्मित पार्थिव लिंग में मक्केश्वर महादेव के नाम से विख्यात होऊंगा और  हे महामद तुम आसुरी संस्कृति का विस्तार करो । इतना कहकर भगवान् शिव ने मयासुर द्वारा निर्मित पार्थिव लिंग ने प्रवेश किया और मक्केश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुए। मुस्लिम समुदाय साउदी अरब मक्का के धर्म स्थल को काबा कहता है और काबा  भारत तथा नेपाल से पश्चिम दिशा में स्थित है इसीलिये मुस्लिम लोग पश्चिम दिशा में काबा की तरफ मुख करके नमाज अदा करते हैं । मुस्लिम समुदाय जीवन में एक बार हज के लिये काबा के दर्शन के लिये जाता है। ये काबा ही मक्केश्वर महादेव हैं जो लिंग रूप में स्थापित है परंतु मुस्लिम समुदाय इस रहस्य को गुप्त रखता है और किसी के सामने स्वीकार नहीं करता है। परंतु भविष्य महापुराण इसका सबसे उत्तम प्रमाण है ।


धर्म रूपी सिंहासन


सनातन वैदिक धर्म रूपी सिंहासन के चार चरण

                  सनातन वैदिक धर्म में पंचदेव उपासना प्रचलित है। पाँच देवता बराबर है, पाँच देवताओं में कोई भी देवता छोटा या बड़ा नहीं है, सभी पाँच देवता ईश्वर हैंपाँच ईश्वर देवताओं में भेदभाव नहीं करना चाहिये ये पाँच देवता ईश्वर कहलाते हैं। ये पाँच ईश्वर देवता हैं:

1. भगवान् शिव

2. भगवान् विष्णु

3. भगवती देवी

 4. भगवान् गणपति

5. भगवान् सूर्य

 सनातन वैदिक धर्म सिंहासन है जिसके चार पाये हैं, चार जगद्गुरु ही चार पाद हैं

 सनातन वैदिक धर्म रूपी सिंहासन के चार चरण हैं:

1. जगद्गुरु भगवत्पाद आदि शंकराचार्य (अद्वैत वेदान्त )

2. जगद्गुरु रामानुजाचार्य (विशिष्टाद्वैत सिद्धांत, श्री वैष्णव)

3. जगद्गुरु मध्वाचार्य (द्वैत सिद्धांत)

4. जगद्गुरु निम्बार्काचार्य (द्वैताद्वैत सिद्धांतनिम्बार्क वैष्णव)


जाति या वर्ण की व्यवस्था इस प्रकार समझें

 साइंस पढ़े हुए लोग जाति या वर्ण की व्यवस्था इस प्रकार समझें कि जैसे स्वर्ण, रजत और ताम्र आदि 3 धातु 3 गुण सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण हैं। अब 3...